बाबाजी राज का बाग

मांगरोल स्थित हाड़ौती के हल्दीघाटी के नाम से प्रसिद्व एतिहासिक बाग बाबाजी राज बाग से जुड़ा एतिहासिक तथ्य यह है कि एक अक्टूबर 1821 को कोटा के महाराव किशोरसिंह द्वितीय और अंग्रेजी सेना के मघ्य युद्व हुआ। बाग के किनारे बाणगंगा नदी के तट पर यह युद्व हुआ। महाराव के सेनापति झाला जालिमसिंह प्रथम ने कोटा नरेश के खिलाफ विद्रोह किया था। जालिमसिंह चाहते थे कि उनके वंशज को पीढ़ी दर पीढ़ी दीवान रक्खो या फिर कोटा राज्य से आधा हिस्सा देकर राज्य कायम करो।यह समझौता 1817-18 में हुआ था। जब किशोरसिंह के पिता महाराव उम्मेदसिंह 10 साल की अल्पायु में कोटा के राजा बने। यह बाग अभी देवस्थान के अधीन है। इसके खाते 155 बीघा भूमि है।






चुनौतियां: देवस्थान विभाग इसकी समुचित देखभाल नहीं करता है। खेती की जमीन जुताने से होने वाली आय भी इस के रखरखाव पर खर्च दी जाए तो जर्जर हो रही इमारत की दशा सुधर सकती है।


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