नहरी जल प्रबंधन की योजना पर अब काम के आसार


24 बरस पहले सुझाई गई थी योजना

मांगरोल क्षैत्र की वृहद सिंचाई परियोजना  लक्ष्मीपुरा 24 बरस से अघर में लटकी है। अब इस पर काम होने की आस बंधी है। 1991 में  सुझाई इस योजना के प्रस्ताव पर उसी समय अमल होता  तो 2.68 करोड़ से भी ज्यादा का फसली लाभ किसानों को मिलता। लेकिन विलंब से परियोजना की लागत 2.42 करोड़ से बढ़ कर करोड़ों की हो गई है।

किसानों के लिए वरदान दायीं मुख्य नहर नयी योजना पर काम होने के बाद इसकी क्षमता में बढ़ोतरी होगी।


केन्द्र से ऋण प्राप्त कर इसे साकार करने का प्रस्ताव था। लेकिन  काम ही शुरु नहीं हुआ। लक्ष्मीपुरा डिस्ट्रीब्यूटरी की क्षमता बढ़ाने, जर्जर नहरों को सुध्ाारने, खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचाने व डामरीकृत मार्गों के निर्माण  की समुचित व्यवस्थाएं करने के लिए यह योजना तैयार की गई थी।

क्या होगा- लक्ष्मीपुरा डिस्टीब्यूटरी की क्षमता  बढ़कर 4.38 क्यूमैक हो जाएगी।  तीस किलोमीटर लंबी नहर अयाना ब्रांच आर डी 43000   से शुरु होकर इटावा क्षैत्र के डूंगरली तक जाती है। इसमें 261 आउटलेट हैं। 8342 हैक्टेयर को सिंचित करती है। क्षमता बढ़ने के बाद  32 हैक्टेयर कृªषि भूमि को सिंचित कर रहा एक आउटलेट 40 हेक्टेयर में सिचाई करेगा।
अभीें इस नहर से गेहूं, सरसों, घनिया, दालें व अन्य जिंसों की 9.42 करोड़ की पैदावार होती है। योजना लागू होने के बाद 11.67 करोड़ की पैदावार होगी। खरीफ की फसलों में 3.84 करोड़ की पैदावार की बढ़ोतरी होगी।
इस योजना के तहत माइनर मरम्मत, फॉल्स रिपेयर , सी.डी. वर्क्स पुल निर्माण ,   पक्के आउटलेट व 22 किलोमीटर सड़क मार्ग बनाये जाने है।

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता भोलाराम ने बताया कि वर्तमान मे नहर की हालत खस्ता है।  पक्की नहरें ना बनने से पानी का लोस हो रहा है। डामरीकृत मार्ग ना होने से मोनिटरिंग में तो दिक्कत आती ही है। कच्ची नहरोंके सीपेज से कई खेत खराब हो रहे हैं। प्रभावी पर्यवेक्षण के अभाव में कभी भी नहर टूटने का खतरा बना रहता है।  ऐसे में पेट्रोलिगं के लिए सड़क निर्माण से भी बड़ी समस्या हल हो सकती है। सारे सिस्टम की मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है।

अब होगा काम शुरू - सहायक अभियंता ने बताया कि नाबार्ड द्वारा स्वीकृत इस योजना के सारे सिस्टम को पक्के करने के लिए दो कार्यो की निविदाऐ जारी होने वाली हैं दो चरणो में होने वाले एक काम की निविदा जारी हो गई , लेकिन संवेदक ने काम शुरू नहीं किया। अब दोबारा जारी होगी। उसके बाद नहरों की दशा सुधरेगी।

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